VEERGI MUSIC LAB
Tu EK Hai
VeerGi · 5:36 · Lab Grown · track 2
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LYRICS
आऽऽऽ… तूऽऽऽ… तू जो दिखाई भी न दे… और तेरे सिवा कुछ दिखाई भी न दे… मैं अपने नाम का पर्दा ताने बैठा था, वो सामने था—मगर मैं बीच बैठा था। मैं हट गया तो हर दिशा में तू मिला, जिसे मैं ढूँढ़ता रहा, वो साँस में मिला। नाम हज़ार—तू एक है! दर हज़ार—तू एक है! साँस-साँस पुकारे यही— मैं नहीं… मैं नहीं… तू एक है! तू एक है! तू एक है! मैं नहीं—बस तू एक है! किसी ने नूर कहा, किसी ने प्राण कहा, किसी ने मौन सुना, किसी ने गान कहा। शब्द आपस में उम्र भर लड़ते रहे— अर्थ मुस्कुराकर बोला—"मैं एक हूँ।" समंदर एक—लहर की पहचान अलग, दीया वही—बस लौ का अरमान अलग। जिसने रंगों को ही सच मान लिया— उससे रंगरेज़ छुपा ही रहा। नाम हज़ार—तू एक है! रंग बेशुमार—तू एक है! साँस-साँस पुकारे यही— मैं नहीं… मैं नहीं… तू एक है! आऽऽ… ना-ना-रे-ना… सा रे ग, रे ग म, ग म प— प म ग रे, सा… आऽऽऽऽ… तूऽऽऽऽ… मैंने माँगा तो मेरा हाथ छोटा रह गया, तूने देना शुरू किया—जहाँ छोटा पड़ गया। एक इच्छा छोड़ के देखा जो मैंने— मेरे भीतर पूरा आसमान खुल गया। तू मिला तो कोई चमत्कार न हुआ, बस "मैं" गिरा—और पर्दा न रहा। जिस घड़ी मैंने तुझे अपना कहा— उस घड़ी कुछ भी पराया न रहा। कोई पराया नहीं! कोई पराया नहीं! जिसमें तू है—वो पराया नहीं! नाम हज़ार—तू एक है! दर हज़ार—तू एक है! साँस-साँस पुकारे यही— मैं नहीं… मैं नहीं… तू एक है! तेरी ख़ामोशी में हर उत्तर मिला, तेरी दूरी में तेरा ही घर मिला। मैं तुझे पाने चला था दूर तक— लौट कर देखा, तेरे ही दर मिला। अब न मंज़िल है, न मंज़िल की तलब, अब न मिलने और बिछड़ने का सबब। बूँद ने सागर से पूछा—"तू कहाँ?" हँस के सागर ने कहा—"तू ही बता।" तू कहाँ? — तू यहाँ! तू कहाँ? — तू यहाँ! दिल कहाँ? — तू वहाँ! हर जगह—बस तू यहाँ! आऽऽऽऽऽ… रे-ना-ना, ता-ना-ना, दर-दिर-दानी… सा रे ग म प ध नि साँ— साँ नि ध प म ग रे सा… आऽऽऽ… तूऽऽऽ… एऽऽक हैऽऽऽ! नाम हज़ार—तू एक है! दर हज़ार—तू एक है! रंग बेशुमार—तू एक है! राह हज़ार—तू एक है! साँस-साँस पुकारे यही— मैं नहीं… मैं नहीं… तू एक है! तू एक है! — तू एक है! तू एक है! — तू एक है! मैं नहीं! — तू एक है! मैं नहीं! — तू एक है! न मैं रहा… न मेरा नाम रहा… बस एक तू… बस एक तू… तूऽऽऽ… एक हैऽऽऽ…
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